Bhim Jayanti Speshal Shayari || Jay Bhim Shayari || Someshwar Sirsat || भीम जयंती शायरी सोमेश्वर सिरसाट || jay bhim shayari
Jay Bhim Shayari in Hindi for Bhim Jayanti. These heart touching shayari are dedicated to Dr. Babasaheb Ambedkar and his inspiring thoughts.
💙💙💙
ना सिंहासन की चाह थी,
ना मुकुटों का अभिमान।
भीम ने बस चाहा था,
सबको मिले सम्मान।
धर्म वही जो मानवता दे,
उन्होंने यही सिखाया था।
अज्ञान के तम को चीर,
ज्ञान का दीप जलाया था।
सोमेश्वर सिरसाट...✍️
लंदन के ओ स्कूल मैं भीम
ने जब कलम चलाया था।
रुपये की हर परछाईं को,
भीम ने समझाया था।
सिक्कों से बड़ी थी सोच,
वो मूल्य का पाठ पढ़ा गए,
एक किताब से दुनिया को,
आर्थिक दिशा दिखा गए।
सोमेश्वर सिरसाट...✍️
ना तलवार, ना सैनिक,
ना कोई युद्ध का नारा।
सिर्फ़ संविधान था हाथ में,
और आँखों में उजियारा।
सोमेश्वर सिरसाट...✍️
जन्म से जो नीचे थे,
उन्हें ऊँचाई दी थी।
गिनती में जो ना थे कल,
उन्हें पहचान दी थी।
भीम की सोच थी अलग,
हर बात में समझ थी।
काग़ज़ पर जो लकीर खींची,
वो क्रांति की रेख थी।
सोमेश्वर सिरसाट...✍️
ना तलवार, ना ही सेना,
भीम की बस सोच थी।
शब्दों में जलती हुई
इंकलाबी ललकार थी।
छूआछूत को तोड़ा,
भीषण बेडीयों का भार,
भीम बना था क्रांति खुद,
शांती में लिपटा अंगार।
सोमेश्वर सिरसाट...✍️
धर्म नहीं था बंधन उनका,
मानवता ही मूल थी।
चुप थे सारे राजा-महाराजा,
भीमने आवाज लगाई थी,
"भीख नहीं, हक चाहिए!"
बात दुनियां को बताई थी।
सोमेश्वर सिरसाट...✍️
संविधान की लेखनी से,
कायदे का किला गढ़ा।
जात-पात के बंधनों को,
भीम ने ललकारा बड़ा।
सत्य के दीप जलाए,
हर झोपड़ी, हर गाव में,
भीम बना वो सूरज जो,
उगा अंधेरों की छाव में।
सोमेश्वर सिरसाट...✍️

Nice post
उत्तर द्याहटवाडॉ. बीआर अम्बेडकर जयंती 2022