आओ लेकर के चला हूं में सबको आईनों के शहर में इंसान समझते हैं जो खुदको उन्हें आईना दिखानें और चलते फिरते देखे हैं मैंने मुर्दे यहां जहां पर अब मुझे यहां कोई इंसान नजर नहीं आता अन्याय को सहना ये इंसान का लक्षण नहीं होता और मुर्दों को इस बात का कुछ असर नहीं होता मैं उन मुर्दों को उनकी चला हूं सूरत को दिखाने इंसान समझते हैं जो खुदको उन्हें आईना दिखानें और भेड़ियों को देखा मैने जब नेता के भेस में देश को लुट रखा इन्होंने अब खादी के भेस में उन भेड़ियों को चला हूं उनका ही तारुख कराने इंसान समझते हैं जो खुदको उन्हें आईना दिखानें सोमेश्वर सिरसाट...
गीतकार सोमेश्वर सिरसाट मो. 8087948366/9324540468