१) अपनी तकदिर खुद बना किसी की राह ना कर। उडान तो भर लेगा पगले पहिले होसला तो बुलंद कर। २) सोच में डूबा हूं गजब ये दुनिया की रफ़्तार देखकर। धन खोज रहे है इन्सानियत छोड़कर और भगवान धुंड रहे है मॉ बाप छोड़कर। ३) कोई कितना के क्यू ना अमीर बने पेट से जादा कभी खा नहीं सकता। और मरने के बाद अपना धन कभी साथ नहीं ले जा सकता। ४) गम तो यूं ही आता रहेगा जिन्दगी में मगर अपने लक्ष को ऎसे बुलंद करना। की गम भी डर जाए तुम्हारा हॉसला देखकर। ५) काटे जिस दिन बिखरे मिले रास्ते में तो समझ लेना मंजिल के करीब पोहाच गए हो
Someshwar Sirsat Shayari हा माझा अधिकृत ब्लॉग असून मी, कवी, गीतकार व शायर सोमेश्वर सिरसाट, सामाजिक, राजकीय, विद्रोही, प्रेम, वास्तववादी तसेच शिव-फुले-शाहू-आंबेडकर विचारसरणीवर आधारित कविता, गाणी, शायरी आणि लेख या ब्लॉगद्वारे प्रकाशित करतो. समाजातील अन्याय, बेरोजगारी, शेतकरी, कामगार, शिक्षण, परिवर्तन आणि मानवी भावनांना शब्दबद्ध करण्याचा माझा प्रामाणिक प्रयत्न असतो. मराठी साहित्य, भीमगीत, परिवर्तनवादी लेखन, सामाजिक चळवळी आणि जनतेच्या प्रश्नांवर प्रभावी रचना वाचण्यासाठी माझ्या ब्लॉगला नक्की भेट द्या