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Someshwar Sirsat Shayari सोमेश्वर सिरसाट शायरी










 

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सांग ना ग पिल्लू...

    गीत सांगना ग पिल्लू.....                           गीतकार :- सोमेश्वर सिरसाट तुला सोनू मोनु जानू  आता कुठवर म्हणायचं सांगना ग पिल्लू.......  कधी लगीन करायचय चढली प्रेमाची धुंदी आली धंद्यात मंदी तू भेटली थेटर मधी घरी सांगून गेली चंदि लपून छपून ग जानी आस कुठवर भेटायच सांगना ग पिल्लू...... कधी लगीन करायचय मर्द गडी असा रंगला बांधला दीलामधी बंगला जीव तुझ्यातच दंगला जोडा शोभल ग चांगला चौकमधी तुझ्या माझ्या लग्नाच बॅनर लावायचय.... सांगना ग पिल्लू...... कधी लगीन करायचय लय खाऊ नको भाव  सांगे सोमनाथ राव गान वंसाच लाव तवा नाचल सारा गाव डिजेच्या ताला वरती आज मलाबी नाचायचय सांगना ग पिल्लू..... कधी लगीन करायचय

Aaino Ke Shahar Mai || आईनों के शहर में || Someshwar Sirsat

    आओ लेकर के चला हूं में सबको आईनों के शहर में इंसान समझते हैं जो खुदको उन्हें आईना दिखानें  और चलते फिरते देखे हैं मैंने मुर्दे यहां जहां पर अब मुझे यहां कोई  इंसान नजर नहीं आता   अन्याय को सहना ये इंसान का लक्षण नहीं होता और मुर्दों को इस बात का कुछ असर नहीं होता मैं उन मुर्दों को उनकी चला हूं सूरत को दिखाने इंसान समझते हैं जो खुदको उन्हें आईना दिखानें  और भेड़ियों को देखा मैने जब नेता के भेस में देश को लुट रखा इन्होंने अब खादी के भेस में उन भेड़ियों को चला हूं उनका ही तारुख कराने  इंसान समझते हैं जो खुदको उन्हें आईना दिखानें   सोमेश्वर सिरसाट...                                            

गजब दुनिया

सोच मै डुबा हूं ! गजब ये दुनिया की रफ्तार देखकर ! दौलत धुंड रहे है ! इंसानियात छोडकर !         और भगवान धुंड रहे है माँ बाप छोडकर !

Tu hi jindagi meri sad song / तू ही जिंदगी मेरी

Tu hi jindagi MERI. तू ही ज़िंदगी मेरी   गीत :- Someshwar Sirsat तुझे ही तो, चाहा है, दिलसे तू ही है, बंदगी मेरी तुझे तो मांगा है रबसे तू ही है आशिकी मेरी तुझ बिन मै जिऊ कैसे तू ही तो है जिंदगी मेरी सही ना जाए ये अब तो ये तड़प बेचैन रातो की मुझे पागल बना देगी तू चाहत हैं मेरे दिल की बस तुझे ही तो चहता हूं तू ही तो है सादगी मेरी सारी खुशियां मिले तुझको तू मलीका है ख्वाबों की चाहे जो भी सजा दोगी ख्वाइश तुमको पाने की जनाजे को अब मेरे कभी ना जरूरत होगी तेरी   पागल थी जो ना समझी तेरी इस दिल चाहत को छोड़के ना जावो मुझको अभी तो जाना है तुझको तेरी हर मन की ख्वाइश  को कर दूंगी मै   अब पूरी

Someshwar sirsat image

Someshwar sirsat

नजर

नजरेला नजरेची लागली नजर काळजाला माझ्या ही भिडली नजर शर्मेने झुकते तर सन्मानाने उठते ही नजर वार नजरेवर नजरेने करते ही नजर भल्या भल्या शस्ञाला फेल करते ही नजर जेव्हा प्रेमाच्या मैदानी लढते ही नजर कभी हसाती है ! तो कभी रूलाती है नजर खेल नजरोका जाने वही नजर ! आखो ही आखो मै जाने क्या कह जाती है ! बिना कुछ बताये सब कह जाती है! भाषा ओ नजरो की जाने वही    ...नजर

Image Someshwar Sirsat

           Image Someshwar Sirsat

वंदन माझे बा भीमाला

    पहिली धडक चवदार तळ्याला    खुले केले काळ्या रामाला      जीवदान दिले गांधीला      माणूसपण दिले माणसाला       सविधान दिले भारताला    त्रिवार हे वंदन बा भीमाला

आश्रुंच्या धारा

या सागराच्या लाटा छेदिती काळजाला माझ्या आश्रुंच्या या धारा शोधीती पावसाला फाटल्या रानाला शब्द फुटलेला पावसाच्या वाटेवरी डोळा हा दिपलेला झोपडीच्या माझ्या दारी आहे ...