भावनाएँ, दर्द, विश्वासघात और ज़िंदगी के सख़्त सबक… कभी लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं, मगर दिल से निकले हुए एहसास ख़ुद-ही शायरी बनकर काग़ज़ पर उतर आते हैं। मेरी कुछ पंक्तियाँ— सोमेश्वर सिरसाट....। 1) मैं बुरा नहीं था। हालातों ने बना दिया है, मुझे दुश्मनों से कोई गिला नहीं… ये जो ज़ख़्म हैं दिलपर, अपनों ने दिया है। — सोमेश्वर सिरसाट 2. मेरी खामोशी को कुछ लोग कमजोरी समझते है। किसे बताऊँ खामोशी से बड़ा कोई तूफान नहीं होता… चुप रहने से बड़ा दुनिया में और कोई दर्द नहीं होता। — सोमेश्वर सिरसाट 3. दिल के इस महल में जिन्हें अपना समझकर रक्खा था… वक़्त की आँधी में वही पहला दरार बनकर टूट गए। — सोमेश्वर सिरसाट 4. कुछ रिश्ते शीशे जैसे होते हैं, चमकते ज़रूर हैं… पर टूट जाएँ तो हाथ नहीं, दिल काट जाते हैं। — सोमेश्वर सिरसाट 5. मैंने मोहब्बत को मिट्टी की तरह पकड़ा, वो हाथों में टिकती ही नहीं थी… शक्ल तो अपनी थी, पर सूरत किसी और निकली थी। — सोमेश्वर सिरसाट 6. ज़िंदगी ने ऐसे सबक दिए कि अब हर मुस्कुराता हुआ चेहरा मुझे तो नक़ाब लगता है… और हर ख़ामोशी के पीछे दर्द की दास्त...
Someshwar Sirsat Shayari हा माझा अधिकृत ब्लॉग असून मी, कवी, गीतकार व शायर सोमेश्वर सिरसाट, सामाजिक, राजकीय, विद्रोही, प्रेम, वास्तववादी तसेच शिव-फुले-शाहू-आंबेडकर विचारसरणीवर आधारित कविता, गाणी, शायरी आणि लेख या ब्लॉगद्वारे प्रकाशित करतो. समाजातील अन्याय, बेरोजगारी, शेतकरी, कामगार, शिक्षण, परिवर्तन आणि मानवी भावनांना शब्दबद्ध करण्याचा माझा प्रामाणिक प्रयत्न असतो. मराठी साहित्य, भीमगीत, परिवर्तनवादी लेखन, सामाजिक चळवळी आणि जनतेच्या प्रश्नांवर प्रभावी रचना वाचण्यासाठी माझ्या ब्लॉगला नक्की भेट द्या